Sonam Malik Wrestler Biography

एक समय था जब हरियाणा में लड़कियों का घर से निकलना मुश्किल था जिन्हे अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी का कोई फेसला नहीं लिया देने जाता था और एक आज का दिन है हरियाणा की लड़कियों ने वो करके दिखाया है जो पुरुषो के लिए भी आसान नहीं है | इन सभी कबीले तारीफ का कोई हक़दार है तो वह है फोगाट बहनो के पिता महावीर फोगाट जी जिन्होंने देश को गोल्ड मैडल दिलाने की उम्मीद में भारतीय महिला कुश्ती का इतिहास ही बदल दिया और वही से सुरुवात हुयी एक नयी महिला कुश्ती की जिसके परिणाम हमे आज देखने को मिल रहे है| देश में आज एक नहीं चार-चार लड़कियों ने ओलम्पिक कोटा हासिल किया | जिसमे आज हम बात करेंगे पहलवान सोनम मलिक की जिन्होंने 62 किलोग्राम भार वर्ग में ओलिंपिक कोटा हासिल किया है |

तो चलिए दोस्तों बात करते है पहलवान सोनम मलिक की सोनम मलिक का जन्म 15 अप्रैल 2002 को हरियाणा के सोनिपत जिले के गाँव मदीना में हुआ | उनका परिवार पहलवानो का परिवार रहा है उनके चचेरे भाई राज्य वह नेशनल स्तर के पहलवान रहे है और उनके पिता भी पहलवानी करते थे संसाधनों के अभाव के कारण वह एक अच्छे पहलवान तो नहीं बन पाए पर उनका सपना था की उनकी बेटी जरूर एक अच्छी पहलवान बने बस यही कारण था की सोनम मलिक को इतनी काम उम्र में अपनी पहलवानी की सुरुवात करने का मोका मिला और वह 2011-12 के आसपास आपने गांव के ही एक अखाड़े में जाने लगी जहा उसके भाई और गाँव के कुछ बच्चे भी जाया करते थे |

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वहाँ सोनम के कोच थे अपने टाइम के अच्छे पहलवान वह आर्मी से रिटायर पहलवान अजमेर मलिक | अजमेर मलिक जी बताते है की उन दिनों वह आर्मी से रिटायर आये ही थे तो उनके मन में कुश्ती अकडेमी खोलने का विचार आया तो उन्होंने वही मदीना गांव में ही एक छोटी सी अकाडेमी की सुरुवात की उसमे वह टेनिस और कुश्ती का अभ्यास कराया करते थे| सुरुवात के कुछ दिन बाद ही सोनम मलिक भी वहाँ कुश्ती के अभ्यास के लिए आने लगी सुरुवात में उनके पास तीन से चार पहलवान ही कुश्ती सिखने आया करते थे | उस समय उनके पास अच्छी ट्रेनिंग के लिए कुश्ती का मैट भी नहीं था वह मिटी में ही अभ्यास कराया करते थे फिर धीरे-धीरे उनके पास पहलवान जुड़ने लगे ओर अच्छा प्रदर्शन करने लगे उसके बाद गांव वालो की सहायता से अकडेमी में मैट की सुविधा भी हो गयी और उसका परिणाम आज आपके सामने है |

Sonam Malik Wrestler Biography

सोनम मलिक को कुछ सालो की कड़ी मेहनत के बाद 2016 में नेशनल स्तर पर मैट पर उतरने का मौका मिला वहाँ उसने किसी को निराश नहीं करते हुए स्कूल नेशनल गेम्स में गोल्ड मैडल अपने नाम किया | उस समय उनको लगा के उनमे कुछ बात है अगर वह और अच्छी ट्रेनिंग करे तो नेशनल ही नहीं इंटरनेशनल स्तर पर भी देश को मैडल दिला सकती है |

अगले साल 2017 में उन्होंने कैडेट नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल अपने नाम किया उनके इस लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उनको अंतराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और वहाँ भी उन्होंने उमीदो पर खरा उतरते हुए पहले वर्ल्ड स्कूल रेसलिंग गेम्स में गोल्ड मैडल देश को दिलाया उसके बाद एसियन चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल और उसके बाद उसी वर्ष कैडेट वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीतकर 2017 की वर्ल्ड चैम्पियन बनी और उसके बाद उन्हें आउट स्टेंडिंग परफॉरमेंस ऑफ़ दा ईयर के ख़िताब से नवाजा गया|

इतना सब खुसी का माहौल चल ही रहा था की उसी वर्ष निजी स्तर की कुश्तियों में उनके कंधे में चोट लग गयी उसके हाथ में इतना दर्द होता था की सोनम अपना हाथ भी नही उठा पाती थी डॉक्टरों का कहना था की उनके कंधो से हाथ तक सिगनल नहीं पहुंच पा रहे है और वह अब कभी कुश्ती नहीं खेल पायेगी ओर इसी हादसे की वजह से सोनम को उनका सपना टूटता दिखाई देने लगा था | सोनम के पिता पास की ही एक शुगर मील में काम करते थे उनके पास इतना पैसा नहीं था की वो किसी बड़े हॉस्पिटल में इलाज कराने का खर्चा उठा सके | उसके बाद उन्होंने देसी इलाज का सहारा लेना सुरु किया और सायद किस्मत को भी यही मंजूर था की सोनम ओलम्पिक में जाए जिसके परिणामस्वरूप कुछ 5 6 महीनो के इलाज के बाद सोनम का हाथ ठीक होने लगा और वो दोबारा कुश्ती के अभ्यास के लिए जाने लगी पर उनको पूरी तरह स्वस्थ होने में एक डेड साल का समय लग गया जो की एक खिलाडी के लिए बहुत मुश्किल समय होता है |

ये है सभी पहलवान जिन्होंने ओलिंपिक में क्वालीफाई किया है – आइये जानते है इनके बारे में कुछ खास बाते

अगले वर्ष 2018 में सोनम को कैडेट एशियाई चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में फिर से भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और अपनी चोट से उभर रही सोनम ज्यादा ट्रेनिंग नहीं कर पाने के कारण दोनों चैंपियनशिप में देश को ब्रॉन्ज़ मैडल से ही संतोष करना पड़ा |

अब साल था 2019 इस वर्ष उन्होंने यूनिवर्सिटी की तरफ से खेलते हुए आल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम में गोल्ड मैडल जीता उसके बाद एसियन चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल जीता और फिर से कैडेट वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीतकर 2019 की वर्ल्ड चैम्पियन का ख़िताब अपने नाम किया |

अब वर्ष था 2020 इतने वर्ष के अच्छे प्रदर्शन और सफलताओ को देखते हुए उनके कोच को लगा की सोनम मलिक में वह छमता है वह देश को ओलिंपिक में भी मैडल दिला सकती है पर सोनम लिए यहाँ इतना आसान नहीं था क्योकि ओलिंपिक क्वालीफायर में जाने के लिए सोनम को उसकी केटेगरी में सीनियर खिलाड़ी REO OLYMPIC की ब्रोंज मेडलिस्ट को हराना था | सुरु में तो सीनियर खिलाड़ी को देखते हुए सोनम के मन में झिजक थी की वो साक्षी मलिक के साथ कुश्ती नहीं कर पाएगी पर फिर उनके कोच ने उनका हौसला बढ़ाते हुए समझाया की उनके पास खोने को कुछ नहीं है पाने को बहुत कुछ है अगर वह ट्रायल में जित जाती है उनका ओलिंपिक में जाने का सपना पूरा हो सकता है उसके बाद सोनम मलिक ने ट्रायल देने का फैसला किया ओर सीनियर खिलाड़ी साक्षी मलिक को ट्रायल में 8-7 से मात दी |

साक्षी मलिक को हराने के बाद सोनम को रोमन रैंकिंग सीरीज और एशियाई चैंपियनशिप खेलने का मौका मिला पर दुर्भागयवश सोनम वहाँ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पायी और फिर एक बार दोबारा सवाल उठने लगे की अगर सोनम अच्छा नहीं कर पा रही है तो क्यों नहीं साक्षी मलिक को एक मौका और दिया जाए और ट्रायल दोबारा कराई जाए और उसके बाद दोबारा फरवरी में फिर से ट्रायल कराई गई उसमे भी सोनम मलिक ने साक्षी को फिर से हरा दिया ओर ओलिंपिक क्वालीफायर में जाने का रास्ता साफ़ कर लिया |

इसके बाद आता है साल 2021 इस वर्ष सुरुवात में ही सोनम को घुटने की चोट परेशान करने लगी और उसके कारण उन्होंने रोम में होने वाली रैंकिंग सीरीज से भी बहार होना पड़ा फिर उसके बाद शुरू होती है जिसका सबको इंतजार था एशियाई ओलिंपिक क्वालीफायर जो अप्रैल में अल्माटी में होने थे | सोनम यहाँ ओलिंपिक कोटा हासिल करने का मौका नहीं गवाना चाहती थी इसलिए उन्होंने चोट का ख्याल नहीं करते हुए क्वालीफायर में भाग लिया और नामी पहलवानो को हराकर सेमीफइनल में प्रवेश किया पर यहाँ वही हुआ जिसका डर था इस मैच में सुरुवात में ही सोनम को घुटने का दर्द सताने लगा और जैसे तैसे चोट से जूझते हुए हौसला रखते हुए सोनम ने सेमीफइनल में जित हासिल की और इसके साथ ही ओलिंपिक कोटा भी हासिल किया |

यहाँ ओलिंपिक कोटा हासिल करने के बाद सोनम ने चोट को देखते हुए फाइनल मैच से अपना नाम वापिस लेने का फैसला किया और सिल्वर मैडल से संतोष करना पड़ा |

तो दोस्तों यह थी भारत की सबसे युवा महिला ओलम्पियन पहलवान की कहानी जो पिछले एक दो साल तक कैडेट में खेला करती थी और आज वह बड़े बड़े सीनियर खिलाड़ियों को हराकर ओलिंपिक तक का सफर इतनी कम उम्र में तह कर चुकी है और हमे पूरी उम्मीद है इस बार भारत की ओलिंपिक मैडल की उम्मीद जरूर पूरी होगी अपनी केटेगरी में सभी क्वालीफाई खिलाड़ी मैडल के परफेक्ट दावेदार है |

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